Wednesday, June 21, 2006

तनु-मनु के लिए..


तनु-मनु के लिए......

तुम मेरी आँखों के पहले सपन
तुम मेरे सपनों के उजले नयन.
तुम मेरी आशा के विश्वास हो
तुम मेरे विश्वास की आस हो.

तुम से सुवासित ये धरती गगन
तुम ही हो श्वासों में बहती पवन.


2 comments:

Pratik Pandey said...

कविता और तस्वीर दोनों ही बहुत सुन्दर बन पड़े हैं।

Anonymous said...

सुन्दर हैै आपका विश्वास,उसकी आस और मन्द बहती पवन। दुआ है यह सब सलामत रहें ।