अपना पता...
.....किसको पता?
कोन सुनेगा?
.....किसको पता?
कोन सुनेगा?
किसको बताएँ?
आँखों के झरने
आँखों के झरने
लगते जब झरने
कहते ना सुनते
बहते ही रहते
यूँ ही बहेंगे
जीने ना देंगे
देंगे ना मरने
आँखों के झरने....
अपनी कहानी
किसको सुनानी
आनी ना जानी...
किसको समय है?
किसको है परवाह?
किसको बुलाएँ?
कोन सुनेगा?
सब लोग खुश हैं....
अपना पता....
......किसको पता?
-संजय विद्रोही



No comments:
Post a Comment