Thursday, July 21, 2005

मन के दोहे....

मोसम बदला, छिन गया मन का सारा चैन
कभी बरसते मेघ-से, कभी तरसते नैन.


आँखों में भर ले गया सारे मेरे प्राण,
घर को वो कर के चला मरघट-सा सुनसान.


जीवन भर की लालसा, जीवन भर का चाव
'उसके मन में राम कर मेरे जैसे भाव'.


चिडी धूल में कूदती, सूरज तपकर लाल
काले बादल आएँगे , ले अपना तिरपाल.

जब से वो आए सखी, देखूं फ़िर फ़िर जाए
अबके कैसे राम जी कीनी मेरी सहाय.

चूडी, बिंदिया, चूनरी-पायल, बिछिया, लाज
वो आए तो आ गई , सब पर रोनक आज.

नींद ना आए रात भर, चैन ना चारों याम
उनके आने की घडी तकना केवल काम.

-संजय विद्रोही

1 comment:

Dharni said...

बहुत बढ़िया!! आप ऐसे ही लिखते रहिये! आजकल तो आपकी साइट रोज़ देखता हूँ..!!