मोसम बदला, छिन गया मन का सारा चैन
कभी बरसते मेघ-से, कभी तरसते नैन.
कभी बरसते मेघ-से, कभी तरसते नैन.
आँखों में भर ले गया सारे मेरे प्राण,
घर को वो कर के चला मरघट-सा सुनसान.
जीवन भर की लालसा, जीवन भर का चाव
'उसके मन में राम कर मेरे जैसे भाव'.
चिडी धूल में कूदती, सूरज तपकर लाल
काले बादल आएँगे , ले अपना तिरपाल.
जब से वो आए सखी, देखूं फ़िर फ़िर जाए
अबके कैसे राम जी कीनी मेरी सहाय.
चूडी, बिंदिया, चूनरी-पायल, बिछिया, लाज
वो आए तो आ गई , सब पर रोनक आज.
नींद ना आए रात भर, चैन ना चारों याम
उनके आने की घडी तकना केवल काम.
-संजय विद्रोही



1 comment:
बहुत बढ़िया!! आप ऐसे ही लिखते रहिये! आजकल तो आपकी साइट रोज़ देखता हूँ..!!
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